फ्रेम में जड़ी तस्वीर कहने को तो उसकी ही होगी पर


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काश

कोई जिंदा रहे

किसी को एक लंबी उम्र मिले

किसी का साथ एक लंबे

समय तक बना रहे

कोई मरकर

जुदा होकर

किसी को तन्हा छोड़कर

एक तस्वीर में

एक शीशे के फ्रेम में कहीं

कैद होकर न रह जाये

फ्रेम में जड़ी तस्वीर कहने को तो

उसकी ही होगी पर

वह भौतिक रूप से कहीं उपस्थित न होकर

मन मस्तिष्क के पटल पर

यादों का एक दरिया बनकर ही

तैर रहा होगा

कितनी भी कोशिश कर लो

कितना उसे याद कर लो

अपने हाथ पांव पटक लो पर

उससे मिलना कभी कहीं न

संभव होगा

उसकी तस्वीर को हृदय से

चिपकाकर

उसे निरंतर याद करते रहना

कभी एक पल को न भुलाना

उसकी यादों को अपनी

बातों के माध्यम से

जीवित रखना पर

उसके प्रति शायद एक सच्ची

श्रद्धांजलि तो अवश्य होगी।


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