बारिश की एक बूंद
जो पड़ी हमारी चितवन पर तो
हमें एक गंगाजल की पवित्र धार की बौछार सा
नहला गई
मन के रेगिस्तान की शुष्क रेतीली भूमि में जैसे
हरियाली का संचार कर उसे तृप्त कर गई
पपीहे की सदियों की प्यास को
बुझा गई।
बारिश की एक बूंद
जो पड़ी हमारी चितवन पर तो
हमें एक गंगाजल की पवित्र धार की बौछार सा
नहला गई
मन के रेगिस्तान की शुष्क रेतीली भूमि में जैसे
हरियाली का संचार कर उसे तृप्त कर गई
पपीहे की सदियों की प्यास को
बुझा गई।
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