छुट्टी का दिन और आराम का तकिया


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इस दुनिया में

भला कौन होगा ऐसा

जिसका मन एक अबोध बच्चे सा नहीं होगा और

जिसे छुट्टियां अच्छी नहीं लगती होंगी

पसरकर बिस्तर पर सोना

भरपूर नींद लेना

छुट्टी वाले दिन खूब घूमना

खूब बतियाना

खूब खाना पीना

खूब पानी से नहाना

खूब मस्ती करना अच्छा नहीं

लगता होगा

कमर टूट जाती है जब काम करते करते तो

फिर से सीधा खड़ा हो पाने के लिए आराम तो करना चाहती ही है

अपनों का जो साथ हो तो फिर

जीवन का कोई एक दिन भी ऐसा न हो जो

उदास हो

मन मयूर सा नाचता है

बिना बरसात भी

छम छमा छम छम

बिना पायल, बिन घुंघरू,

बिन बादल

बस एक छोटी सी शर्त कि

अपनों के बीच अपनेपन का अहसास हो प्यार की बरसात हो

करवट बदलते रहने के लिए

छुट्टी का दिन,

फुरसत का समय और आराम का तकिया साथ हो।


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