मेरे दिल में कोई उतरकर देखे


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जो मेरे दिल में

कोई उतरकर देखे और

फूल नहीं

नश्तर के बीच पलकर देखे

सुबह को रात और

रात को फिर ख्वाब न बनते

देखे।


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