सपनों के सफर में


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सपनों का क्या है

उनका तो एक अंबार लगा है लेकिन

उन्हें लगातार कोई कुचलता रहे तो

सपने फलीभूत हों कैसे

ऐसी स्थिति में

कोई सपने बंद आंखों से देखना बंद

कर देता है पर

खुली आंखों से अपनी मंजिल की तरफ

कदम बढ़ाने में ही प्रयासरत रहता है

मंजिल जो पाता है तो

सपने हकीकत में पूर्ण होते हैं

सपनों के सफर में जब साथ कोई

हमसफर नहीं होता और

जब एक काफिला साथ होता है

उन्हें रौंदने के लिए तभी

सपने देखने वाला मन ही मन

यह प्रण लेता है कि

इन्हें अपने ही दम पर

एक न एक दिन हासिल

करना है लेकिन

खामोशी से

बिना शोर मचाये और

बिना किसी की सहानुभूति और मदद के।


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