मेरे सायों के पीछे पीछे


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यह इतनी सुंदर जगह कौन सी है

जहां तुम मुझे ले आये हो

यहां आसमान है आसमानी रंग का

सफेद बादलों से पटा हुआ

एक झील भी है नीले रंग की

उस आसमानी रंग के आसमान के ही रंगों से भरी

पहाड़ हैं भूरे से

पेड़ हैं हरे से  

घर भी बने हुए हैं

जिनमें कुछ दिनों के लिए ठहरा जा सकता है

हवा भी ताजी फूलों की खुशबूओं से लबरेज

सब कुछ तो है यहां

रंग भी लगभग सारे

खुशबू भी भीनी भीनी सी सांसों में भरती

यहां फूलों से मुस्कुराते लोग भी रहते हैं

और उनकी पानी में पड़ती परछाइयां भी

मेरी यादों के दर्पण भी यहां

एक चमकते शीशे से ही झिलमिलाते हैं

मैं तुम्हें ढूंढते हुए यहां तक पहुंच गई हूं

तुम मुझे पाना चाहते हो तो

मेरे सायों के पीछे पीछे

आहिस्ता आहिस्ता

हौले हौले

धीमे धीमे कदमों से मेरे पास चले आओ

मेरी प्यासी रूह के आगोश में समाने के लिए।


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