मैं उठूंगा और चमकूंगा


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मैं नभ का एक चमकता

सितारा था और

मरते दम तक रहूंगा

दुनिया वालों

तुम लाख कोशिश कर लेना

मुझे मेरे स्थान से हटाने की,

गिराने की,

हराने की लेकिन

तुम्हारी सब चालें मैं

विफल कर दूंगा

तुम कहीं सफल हो भी गये जो

मुझे आकाश से धरती की

तरफ फेंकने में तो

मैं नीचे की तरफ

प्रस्थान करते हुए भी

आसमान में

अपनी आभा का मंडल

सुशोभित करूंगा

एक आतिशबाजी करती

चारों दिशाओं में चिंगारी

छोडूंगा

मैं जमीन की सतह को

छूने से पहले किसी घनी

झाड़ी के शीर्ष पर

बैठ जाऊंगा

अपने उस नये स्थान को

अपने लबों से चूम लूंगा

मैं काठ के इस सिंहासन पर  

विराजमान होकर

एक जुगनू सा ही चमकूंगा

मैं यहां भी अपना

अस्तित्व कायम रखूंगा

अपना एक मुकाम हासिल

करूंगा

मैं एक राजा की तरह ही

यहां की अपनी नई व्यवस्था या

अपनी प्रजा पर

राज करूंगा

तुम मेरा अधिकार क्षेत्र

कुछ कम कर सकते हो लेकिन

मेरे मन की शक्ति और

कार्य की गति को रोक

नहीं पाओगे

मैं कहीं भी रहूं

मैं गिरूंगा

फिर उठूंगा और

फिर आसमान में रहा तो

एक सितारे सा और

इस जमीन पर रहा तो

एक जुगनू सा और

इस कायनात में तो

एक लश्कारे मारते

दिलकश, रंगीन, चमकीले नजारे सा ही

चमकूंगा।


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