धोखा


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धोखा तो

किसी के हत्थे चढ़ जाओ तो

हर कोई देता है

इंसान क्या

मौसम भी धोखा देता है

मैदानी इलाकों में

पहाड़ी इलाकों से अधिक सर्दी का

पड़ना

कुदरत का

बेशक जानबूझकर न सही पर

कुदरत का एक कहर

एक धोखे सा ही प्रतीत होता है

किसी के प्रभाव में आ जाना

उसके हाथों खुद का शोषण करवाना

उसकी मीठी बातों के बहकावे में आ जाना

इसका अंजाम आखिर में धोखा ही होगा

किसी के दिल का मासूम होना और

सामने वाले का एक हिंसक पशु समान होना

शिकारी के सामने उसका शिकार हो

खुद को परोसने को तैयार तो

उसका शिकार तो होगा

धोखे से खुद को बचाना

स्वयं पर ही निर्भर

किसी पर जरूरत से ज्यादा भरोसा

कभी न करें

किसी की गिरफ्त में खुद को बहुत न

फंसायें

सामने वाले का समय समय पर आकलन

करें

सजग रहें, सावधान रहें

हर किसी को अपने जैसा न समझें

कुछ भी अप्रिय घटित हो सकता है

आप भी इसकी चपेट में आ सकते हैं

जिस पर सबसे अधिक करते हैं विश्वास

उसी से सबसे बड़ा धोखा खा सकते हैं तो

सावधान रहें

भरोसा करना ही है तो स्वयं पर करें या

बस प्रभु पर

बाकी सबसे एक निश्चित दूरी बनायें और

धोखा खाने से खुद को बचायें।


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