उसके अंतिम शब्द कुछ भी नहीं थे


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अपनी अंतिम यात्रा से पहले

उसके अंतिम शब्द कुछ भी नहीं थे

उसकी देखभाल के लिए

उसके घर वाले ही जो उसके करीब नहीं थे

आखिरी सांस तक भी

उसे उम्मीद थी कि

वह ठीक हो जायेगा

अपने घर वापस लौट जायेगा

अपने परिवार के साथ

कुछ समय और बिताने में

सफल हो पायेगा

जीवन के कुछ और पल जी

पायेगा

वह बहुत आशावादी था

उसने इतनी कठिन यात्रा के

समय भी अपना संयम और

मानसिक संतुलन

पल भर को न खोया था

उसका व्यवहार सबके प्रति

बहुत मृदु था

सम्मानजनक था

अपनेपन से भरा था

ऐसा प्रतीत हो रहा था कि वह

अभी कुछ सदियां और

हमारे बीच अपनी उपस्थिति

दर्ज करायेगा

वह जिंदा है

अभी भी है

ऐसे जिंदादिल लोग कभी नहीं

मरते

वह महक रहा है आज भी

एक ताजा गुलाब के फूल सा

हमारी यादों के उपवन में।


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