तन में ताकत
नहीं रही पर
मन की शक्ति
तेरे नन्हे कोमल हाथों को
थामकर ही
बढ़ती है
तू है मेरे सपनों का एक सुंदर जहां
तुझे देख कर ही मुझे जीने की चाह,
मंजिल की राह और
हौसलों की उड़ान
मिलती है।
तन में ताकत
नहीं रही पर
मन की शक्ति
तेरे नन्हे कोमल हाथों को
थामकर ही
बढ़ती है
तू है मेरे सपनों का एक सुंदर जहां
तुझे देख कर ही मुझे जीने की चाह,
मंजिल की राह और
हौसलों की उड़ान
मिलती है।
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