कठिन है पथ पथरीला
सिर पर गठरी का बोझ है भारी
धूप घनेरी
प्यास है गहरी
आहिस्ता आहिस्ता पग धरो
साथ चलो
बतियाती चलो
मिलजुल कर ही कटते जीवन के
यह रास्ते
एक पेड़ की तरह अकेले
एक कोने में खड़े रहने में ही
कौन सी समझदारी है
कंगन सब खनकाती चलना
पायल सब छनकाती चलना
सुर से सुर मिले सबका
यह ध्यान रहे
मंजिल से न भटके ध्यान
इसका भी ज्ञान रहे
रास्ता कट जाये पलक झपकते
मंजिल तक पहुंचे हंसते खेलते
तो कोई बात बने
हम सब सहेलियां
रंग बिरंगी परिधानों में सजी
फूलों की क्यारियों पर
मंडराती जैसे हों असंख्य
तितलियां
हम सब एक हैं
हमें न किसी बात का डर है
दिन भर में समेट लेती हम सब
ढेरों छोटे-बड़े काम
मिलजुल कर जो करती तो
कठिन कार्य बन जाता आसान
एकता में शक्ति है
हम नारी भी शक्ति की
जीती जागती एक पहचान
एक सजीव मूरत भक्ति की
एक यथार्थ चित्रण कल्पना शक्ति की।
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