सांझ ढलने से पूर्व
सूरज की गेंद को
अपने हाथों से पकड़ना है
थोड़ी देर इसके साथ खेलना है
अपने जश्न की खुशी में इसे भी शामिल करना है
यह तो गनीमत रही कि
आज हम एक नहीं दो हैं
साथ-साथ
एक और एक होते भी ग्यारह हैं
एक दूसरे का साथ है और
प्रकृति का सानिध्य भी तो प्राप्त है
सब कुछ तो है
शांत और खूबसूरत
मनोबल को जमीन से उठाकर आसमान तक पहुंचाने वाला
सूरज भी तो राजी है
हमारे साथ अभी खेलने को
वह नहीं है तैयार कुछ देर अभी
ढलने को
सबका तो सहयोग मिला है हमको इससे अधिक की आशा करना
फिर व्यर्थ सा ही लगता है।
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