सूरज का फूल


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सूरज का फूल

आहिस्ता आहिस्ता देखो

खिल तो रहा है

अपनी स्वर्णिम किरणों की सहायता से

चारों तरफ अपने सुनहरे रंगों की छटा

बिखेर तो रहा है

यूं तो यह इस बात से अंजान नहीं कि

शाम होते होते ढलना

इसकी नियति है लेकिन

डूबकर अगले दिन सुबह उगना भी तो तय है।


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