सुबह सवेरे


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कल रात कई दिनों के बाद

मैं एक अच्छी नींद सो पाई

आज सुबह

सबसे पहले उठकर

मुझे भोर के सूरज की पहली किरण जो देखनी थी

सूरज मुझसे मिलने आता

इससे पहले मैंने सोचा कि

आज सुबह सवेरे

जल्दी से जगकर

तैयार होकर

मैं ही उससे मिल आऊं

हर सुबह

यह सूरज ही है जो मुझसे और सबसे मिलने की

पहल करता है

कभी कभी पहल दूसरी तरफ से भी तो होनी चाहिए

उसकी निरंतरता या उसके द्वारा किये गये

निरंतर प्रयासों से

मुझे या हम सबको भी तो कोई सबक लेना चाहिए

रोज सवेरे सूरज के उगने के साथ साथ

हमें भी जगना चाहिए

उसकी तरफ देखकर मुस्कुराना और

एक फूल की तरह ही खिलना चाहिए।


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