सुबह की शुरुआत एक चाय की प्याली के साथ


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जब मैं सुबह की चाय पीती हूं

आसमान के सूरज की तरफ देखती हुई तो

उसकी तपिश

उसकी लालिमा

उसकी ऊर्जा को

एक चाय सा ही

अपने भीतर उतारती हूं

आहिस्ता आहिस्ता चाय को पीती हूं 

उसका भरपूर स्वाद लेते हुए

अपना सारा ध्यान केंद्रित कर देती हूं बस उस पर ही जैसे

उस पल वही हो मेरी सब कुछ

वैसे सच में देखा जाये तो

सुबह की शुरुआत होती तो एक चाय की प्याली के साथ ही है

जब कभी काम से ब्रेक लेना हो तो

चाय ही सबसे ज्यादा याद आती है

चाय के बिना क्या किसी का गुजारा है 

चाय की प्याली हाथ में पकड़कर

इसे एक एक घूंट भरकर पीने में जो मजा है

वह मजा कहीं और कहां

एक चाय का साथ

सुबह की ताजगी और कहीं

मिल जाये

अपनों का साथ फिर तो

कहने ही क्या।


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