सुनो आसमान
आज तुम कितना बरसोगे
बरसते चले जाओगे या
थोड़ा कहीं थमोगे भी
इस प्यासी जमीं की प्यास तो
कभी की पूरी हो ली
यह तुम्हारी पानी की बौछार
अपने जिस्म पर सहते हुए
अब परेशान हो ली
तुमने जो एक हद पार कर दी है
उससे इसकी खुशी अब दुख में
बदलने लगी है
तुम्हारी फुहार अब इसे कोड़े की मार सी
लग रही है
थोड़ा तुम थम जाओ
अब तो यही गुजारिश है
अपने घर तुम वापस लौट जाओ कि
किसी की जिंदगी उसकी सांसों पर
अब भारी है।
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