सांझ की बेला में
सूरज को डूबना ही होता है
यह प्रकृति का नियम है
दिनभर जो रहा आसमान में
अपना सीना चौड़ा करके
सारे जग में जिसने फैलाया
अपना प्रकाश
उसे अपने घर की ओर
प्रस्थान करना ही पड़ता है
दिन फिर दोपहर फिर सांझ
फिर रात
यह क्रम एक निश्चित गति से
चलता है
सूरज का स्थान चंद्रमा और
प्रकाश की जगह अंधकार
आखिरकार ले ही लेता है
गोधूलि में हर कोई अपने
घर लौट रहा होता है
चाहे वह आकाश में फैली
प्रकाश की किरणें हों
चाहे पंछी या
फिर हो मनुष्य या
कोई भी जीव जंत।
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