सरलता की सुंदरता यही कि


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सरलता की सुंदरता यही कि
इसमें होती कोई जटिलता नहीं
सिंदूरी सूरज माथे पर विराजमान
हृदय में हरे भरे बागों की हरियाली सी ताजगी
चेहरे पर चमक एक चांद की
तन में लचक एक मोम की
मन में महक एक गुलाब की
वाणी में मिठास एक शहद की
जीवन के रस में श्रृंगार कांच की चूड़ियों की खनक का
एक परिंदे में बसे खुद की जान
यह दुनिया अपनी लेकिन
न जाने क्यों
हर कोई इस बात से अंजान
पानी की लहर का बहाव ठहरता है या बहता है
इससे कोई सरोकार नहीं
खुद में बस कहीं खुदा बसता है
इस सच से इंकार नहीं।


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