शिक्षक तो हर कोई है


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शिक्षक वह व्यक्ति है जो

एक अच्छी शिक्षा प्रदान कर पाने की

क्षमता रखता हो

यह एक शिक्षार्थी का फिर

कर्तव्य भी है कि

वह इस शिक्षा को भलीभांति ग्रहण करे और

इसे प्रयोग में भी लाये और

इसका उचित मात्रा में लाभ उठाये

यह वह नहीं कर पाया तो

ऐसी शिक्षा का कोई अर्थ नहीं रह जाता

शिक्षक तो शिक्षा शिक्षार्थी तक

पहुंचाने में सफल माना जायेगा लेकिन

ऐसी स्थिति में शिक्षार्थी असफल कहलायेगा

शिक्षा ग्रहण करने के स्रोत तो

असंख्य हो सकते हैं जैसे

किताबें, प्रकृति, जीव जंतु,

मानवीय व्यवहार, उसकी भावनायें, उनकी संवेदनायें आदि

लेकिन शर्त घूम फिर कर फिर वही

एक कि इससे जो ज्ञान अर्जित

किया वह उपयोग में कितना लाया गया

किसी व्यक्ति के जीवन में

उसकी बाल्यावस्था में उसके

मां बाप फिर

उसका परिवार फिर उसका

शिक्षण संस्थान,

समाज

सबकी महत्वपूर्ण भूमिका है

शिक्षा का दायरा

समय के साथ बढ़ता जाता है

अपनी सोच विस्तृत करके

गर देखोगे तो पाओगे कि

शिक्षक तो यहां इस जहां में

हर कोई है

हर किसी से हम कुछ न कुछ सीख

सकते हैं

बशर्ते अपना दिल और दिमाग

खुला रखें और

हर समय कुछ सीखने की

कुछ खुद में समाहित करने की

खुद को शिक्षित करने की

मन में चाहत रखें।


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