हरी भरी वादियां
एकाएक मुरझा गयीं
पूछ रही राह चलते मुसाफिरों से कि
तस्वीर उतारते हुए अपनी
कैमरे में
वह उन वादियों को जिसमें
आये थे वे घूमने को
कैसे भूल गये
वादियों की सुंदरता को देखकर ही तो
प्रसन्न हुए थे सब
एक रूहानी सुकून का भी
अहसास हुआ था
प्रकृति की गोद में कुछ पल
खेलकर अपने सारे गम भूले थे
कितना कुछ दिया था
इन खुशियों से लदी फदी वादियों ने उन्हें
इन मुसाफिरों ने इन वादियों को पर
जरा सा भी मान न दिया
सम्मान न दिया
तस्वीर में अपने साथ इन्हें कैद
नहीं किया और
इन्हें बेवजह नकार कर भर भर
रुला दिया।
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