मां बाप का
यह दुनिया छोड़कर जाने पर
ऐसा प्रतीत हुआ कि
मेरे दोनों हाथ कट गये
मेरा हृदय मेरी देह से बाहर निकल आया
मैं निष्प्राण हो गई
बेजान हो गई
बेनाम हो गई
एक बुत बन गई
खामोशी के गहन अंधकार में डूब गई यह वेदना असीम है
मेरी उम्मीदों का पतन हुआ
मैं निराशा के सागर में डूबी हुई हूं
नहीं जानती
वह कौन सी सुबह होगी जो
मेरा हाथ पकड़कर मुझे इस
अनंत रात के अंधकार भरे
दलदल से बाहर निकालेगी।
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