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राखी

आज २० साल बाद सुमोना और विशाखा मिलने वाले हैं. Facebook पर अचानक उनका पुनर्मिलन हुआ तो रहा न गया .तय ये हुआ कि अभी एक दूसरे से कुछ न पूछें..मिलने पर जब एक एक बात पता चलेगी तो उसका मज़ा ही कुछ और होगा.अपना अपना सामन बांधते हुए दोनों अपने अतीत में खो गए…….सुमोना और विशाखा…..ये दोनों नाम एक अटूट जोड़ी के थे….एक साथ खाना….एक साथ जाना….यहाँ तक की एक जैसे कपडे भी….दोनों एक ही स्कूल में पढ़ते थे और एक ही कालोनी में पडोसी थे.दोनों में एक और समानता थी.दोनों अकेली थीं….उनके कोई और भाई बहिन नहीं था….दोनों एक साथ बहुत ही मस्ती करते..

एक बार उनके हिंदी की किताब में एक कहानी थी…”राखी”..उस कहानी की नायिका का कोई भाई न था.उस नायिका ने अपनी माँ से एक दिन पूछा की क्या वह किसी को अपना भाई बना सकती है? इस पर उसकी माँ ने जवाब दिया”बेटा भाई बनाना आसान है मगर निभाना बहुत मुश्किल”यह वाक्य सुमोना और विशाखा दोनों को कभी समझ में नहीं आता था की इसमें इतनी मुश्किल क्या है….भाई को राखी बांधो तो भाई बन जाते हैं फिर निभाने में क्या मुश्किल है?उन्होंने अपनी यही उलझन अपनी माँ के सामने राखी.मगर माँ कुछ समझा न पायी.

 

देखते ही देखते दिन बीतते गए…अचानक सुमोना के पापा का तबादला बंगलोरे हो गया.जैसे ही दोनों दोस्त बिछड़े कुछ ही दिनों में उनके बीच का संपर्क भी टूट गया.”

सुमोना….क्या कर रही हो…….flight का टाइम हो गया है…” उसके पति ने आवाज़ लगायी तब उसकी तन्द्रा भंग हुयी.

‘ओह हाँ….सुनील…..मैं तैयार हूँ….आज मुझे अजीब सा लग रहा है……कितने सालों बाद मैं विशाखा से मिलूंगी…..”

flight मुंबई एअरपोर्ट पर लैंड करने लगी…..सुमोना ने विशाखा की फोटो हाथ में ही पकड़ी हुयी थी..पहचानने में आसानी के लिए…उसे recieve करने वो आ जो रही थी एअरपोर्ट पर.

flight के लैंड होते ही सुमोना की आँखे विशाखा को खोजने लगी…दूर लाल रंग की साडी में एक खूबसूरत सी महिला दिख रही थी..शायद वही तो नहीं?…झट सुमोना ने फोटो निकाला और मिलाया…yes yes ….यही है विशाखा…वही सुंदर पतला चेहरा…वही लम्बे बाल…वही मुस्कराहट……

दोनों सहेलियां एक दूसरे से लिपट कर रो पड़ी…सुनील से सुमोना ने विशाखा को मिलवाया…और तीनो एक कार में बैठ कर चल पड़े.सुनील ने रास्ते में ही उतरते हुए कहा की वो अपना कुछ काम निपटाते हुए पहुंचेगा ….तब तक दोनों सहेलियों को जी भर के बातें करने का मौका मिलेगा.ये आईडिया दोनों को बहुत पसंद आया…..और बातों का सिलसिला शुरू हो गया…..

.रास्ते में बहुत भीड़ थी…..जगह जगह राखी बाज़ार सजे हुए थे…….दोनों के मुंह से बरबस निकला……अरे राखी आ रही है…..दोनों को वही पुरानी राखी कि कहानी याद आ गयी…..भाई बनाना आसान है मगर निभाना बहुत मुश्किल……..मगर आज दोनों को उसका मतलब अच्छी तरह से समझ आ गया था…

सुमोना कहती जा रही थी ..Bangalore में हमारे पड़ोस में एक परिवार रहता था….बहुत ही मिलनसार…गौरव उनका बेटा था…..धीरे धीरे हमारे परिवारों के बीच घनिष्टता बढ़ने लगी….गौरव मेरी हर तरह से मदद करता…हर एक समय एक बड़े भाई कि तरह मेरी परछाई बनकर मेरी हिफाज़त भी करता.मैं उसमे अपने भाई कि छवि देखने लगी..उस पर बहुत भरोसा भी करने लगी.वह भी उतni ही निष्ठां से अपना भाई धर्म निभाता था.एक राखी के दिन वह सवेरे आ गया और मुझसे राखी बंधवाने की जिद करने लगा.मेरी आँखों में आंसू आ गए…झट राखी कि थाली सजाकर मैंने उसे तिलक लगाकर राखी बाँधी…मुझे एक भाई मिल गया था….भाई……फिर क्या था….मुझे तो जैसे सब कुछ मिल गया…. गौरव भी अपना धर्म निभाने में कभी पीछे नहीं होता था……..समय बीता…..गौरव कि शादी होने वाली थी….मैंने एक ननद होने की पूरी तैय्यारी कर ली थी….सोचा था भाभी आएगी तो उसे ऐसे कहूँगी…वैसे कहूँगी………….भाभी आई……मगर धीरे धीरे ऐसा लगने लगा जैसे गौरव मुझे avoid करने लगा हो….अब मुझसे न उतना बात करता न मेरे घर आता…..मैं एक दिन जब उसके घर गयी तो वो जैसे dar के मारे अपनी पत्नी को आवाज़ देने लगा……मीना….मीना…..नीचे आओ….जल्दी आओ….देखो सुमोना आई है…….मुझे बड़ा ही insulting लगा….मीना भाभी भी मुझसे बस ऐसे ही बात करने लगी जैसे मुझसे पीछा चाहती हो……मैं चुपचाप वहां से आ गयी.शायद गौरव ने ये भांप लिया था……

थोड़ी देर बाद वो पीछे पीछे आया और कहने लगा….सॉरी सुमोना …actually……. तुम्हारी भाभी मेरा किसी से भी बात करना …ख़ास कर लड़कियों से गवारा नहीं कर पाती है…….

लड़की????what do you mean…..मैं तुम्हारीsister हूँ….

I know…….but उसे बनायीं हुयी बहन का मतलब समझ नहीं आता है……..सुमोना रोती जा रही थी………

और विशाखा???वो भी रो रही थी…….”सच कहा तुने सुमोना…..मेरी भी येही कहानी है…..बस फर्क इतना है कि मेरे पति किसी बनाये हुए भाई का मतलब नहीं समझते हैं…….दोनों एक दूसरे से लिपट कर रोने लगे…….और कहने लगेभाई बनाना आसान है मगर निभाना बहुत मुश्किल…………..

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