कई बार या
यूं कहें कि अक्सर
मंजिल की तरफ ही
टकटकी लगाकर
देखते रहते हैं और
रास्ते के हसीन मंजरों या
नजारों पर
एक भी निगाह नहीं डालते लोग
सुंदरता की भी न जाने
कौन सी परिभाषायें होती हैं
कुछ लोगों की
तन की सुंदरता के आगे
मन की सुंदरता को
हर तरह से भुलाये बैठे होते हैं
ये बेमुरव्वत लोग।
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