रात्रि का समय
यकीनन दिन के समय की तुलना में
शांत होता है
कोलाहल से दूर
एक विश्राम स्थल सा प्रतीत होता है
दिन भर की थकान शाम होते होते
अपने चरम पर होती है
जैसे जैसे शाम का सूरज ढलने लगता है और
अंधकार का दामन अपने पैर चारों ओर पसारने लगता है
जिस्म की थकान आराम मांगने की
एक जोरदार सिफारिश करने लगती है
पहले एक कुर्सी पर बैठकर
सामने दूसरी कुर्सी रखकर
फिर गोद में तकिया रखकर
थोड़ा सा आगे सरककर
पैर अपने दूसरी कुर्सी पर फैलाकर
सिर अपना पहली कुर्सी पर टिकाकर आराम की मुद्रा में खुद को कहीं
स्थापित किया जाता है लेकिन
आहिस्ता आहिस्ता बिस्तर की तरफ बढ़कर
उस पर ही खुद को लिटा दिया जाता है आंखें बंद करके
कमरे में भी अंधेरा करके
रात्रि के शांत वातावरण से
ढेर सारा सुकून पाने का प्रयास किया जाता है
ऐसा लगता है कि
एक मीठी नींद आ जाये
कुछ पलों को राहत सी तो मिले
इस रात्रि तो स्वप्न भी न आयें
मुझे नींद में कहीं बीच में न उठायें
निद्रा भंग होने पर
कमरे की किसी खिड़की पर पड़ा पर्दा हटाकर
बाहर के दृश्यों का नजारा आंखों में
कैद किया जाता है
एक तुलनात्मक अध्ययन भी थोड़ा सा किया जाता है कि
दिन में जो नजारा था वह रात के अंधकार में कैसा दिखता है
शांति की लहर रात के अंधकार में
कैसे चारों तरफ लहरा रही होती है आसमान भी खामोश होता है
चांद सितारे भी अपनी अपनी जगह चुपचाप स्थापित होते से दिखते हैं
न परिंदों का कौतूहल
न किसी जीव जंतु का कहीं इधर से उधर आवागमन
यह रात्रि का समय एक अलग ही विचित्रता से भरी दुनिया का
अहसास कराता है जो शांत है
जैसे अपनी ही दुनिया में लीन हो
किसी ध्यान मुद्रा में जैसे हो संलग्न।
0 Comments