कई बार
एक आखिरी विकल्प
बचता है
किसी के जीवन में कि
वह सिर्फ अपनी परछाइयों के साथ रहे और
अफसोस तब होता है
जब यह परछाइयां भी नहीं बनती
गर बनती भी है तो
आपका साथ देने से साफ इंकार करती हैं।
कई बार
एक आखिरी विकल्प
बचता है
किसी के जीवन में कि
वह सिर्फ अपनी परछाइयों के साथ रहे और
अफसोस तब होता है
जब यह परछाइयां भी नहीं बनती
गर बनती भी है तो
आपका साथ देने से साफ इंकार करती हैं।
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