कल किसने देखा है
जो कुछ है
वह यही एक पल है लेकिन
यह पल भी हाथ कहां
आ रहा है
एक रेत की तरह मेरी बंद
मुट्ठी से फिसलता ही चला
जा रहा है
यह जीवन का अनुभव
मुझ अकेले का नहीं
हर किसी का है
जीवन के रास्ते चाहे
कितने भी हों दुर्गम लेकिन
इस बात से किसे है
इंकार कि
जीना फिर भी हर किसी को
रास आ रहा है।
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