जिंदगी उतनी ही समझ जाती है
जितनी तुम्हें जीने के लिए मिली
होती है
काश यह एक ख्वाब सी होती
एक दुआ सी
पूरी होती किसी मन मांगी मुराद सी
होती
जिंदगी मेरी जो मुझे मिली
वह कभी मेरी अपनी है
यह तो महसूस होने देती
मेरा दिल तोड़ हमेशा तो मुझसे
बेवफाई न करती
एक बेकसूर आदमी को उसके किन गुनाहों की सजा देती है यह जिंदगी
फूल उस पर बरसाने की जगह
उस पर कोड़ों की बरसात
करती है
दिल के रिश्तों को
महकाने के बजाय उनमें
आग लगाने का काम करती है
जिंदगी तू मुझे रास नहीं आ
रही
एक मासूम के साथ तू क्यों
हमेशा दगा करती है
मेरा शिकायत भरा लहजा है
क्योंकि तू है ही इसी काबिल
तुझे कभी गले न लगाऊं
तुझसे हमेशा के लिए दूर चली
जाऊं
तू कभी मेरी थी और
मैं थी कभी तेरी
यह भूले से भी मानने को
तैयार न हो पाऊं।
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