यह चर्च पुराना है
मुझसे भी पुराना
इसके अंदर जाने पर
इतिहास की किसी किताब के पन्ने
सहसा पलटने लगते हैं
मन में एक आस्था का भाव भी है
चर्च में पड़ी लकड़ी की बेंचों को
देखकर
फूलों के गुलदस्ते में
कुछ मुरझाये फूलों की गंध को
सूंघकर और
जलती हुई मोमबत्तियों के
मोम को पिघलता देखकर
कहीं यह अहसास मन में
उपजता है कि
हर किसी की तरह
अपने जीवन का भी एक
दिन यही अंत होना है
उससे पहले तभी तो हर किसी
को प्रभु की शरण में
पहुंचना आवश्यक होता है
चर्च की खिड़की पर पड़े पर्दे
हवा के थपेड़ों से हिल रहे हैं
लेकिन खिड़कियां जाम हैं
जैसे सदियों से किसी ने इन्हें
खोला नहीं है
बाहर निकलने पर
एक फैला हुआ जंगल सा
दिख रहा है
वहां कुछ कब्रें भी दिख
रही हैं
हर किसी के जीवन का यही
आखिरी पड़ाव है
हे ईश्वर
हे मेरे पिता परमेश्वर
हे मेरे ईसा मसीह
आपसे यही विनती है कि
अपने हाथों से हर किसी
जीवात्मा का जीवन संवार देना
मरने के बाद भी उसे
दो गज जमीन और
सरसराती ताजी
हवाओं का एक खुला
आसमान देना।
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