बारिश में
आज भीगने का नहीं बल्कि
खुद को सुखाने का दिल
चाह रहा है
यह ख्वाहिशों का मिजाज भी
बदलता रहता है
मौसम के बेहिसाब रंगों की तरह ही कभी सूखा
कभी गीला
कभी रंगों से भरा रंगीन
कभी छप छप बारिश की बूंदों सा बरसता गमगीन
कभी ठहरा हुआ
कभी चलायमान
कभी विस्तृत
कभी संकुचित
कभी एक दरिया की शोर मचाती लहरों सा
कभी चेहरे की ढाल पर
ठहर गई बारिश की पानी की बूंद की एक लकीर सा।
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