मोहब्बत जो की है
किसी से कभी
दिल से तो
दर्द तो होगा ही
मरते दम तक
इससे कभी कोई बच नहीं सका है
आंख हैं तो आंसू होंगे
आसमां है तो बादल होंगे
बारिश है तो पानी के सैलाब होंगे
फूल के संग कांटे होंगे
इश्क की आग है तो
उसमें दर्द के जलते अंगारे भी होंगे
प्रेम हो तो भी
न हो किसी से तो भी
मिल जाये तो भी
न मिले तो भी
खो जाये तो भी
न खोये तो भी
खुद का हो जाये तो भी
किसी गैर की बाहों में समा
जाये तो भी
मोहब्बत भरी होगी जिस
दिल में
वह तड़पेगा
रोयेगा
चीखेगा
चिल्लायेगा
दर्द से करहायेगा
हमेशा
अधिकतर
ज्यादातर
तन्हाई में
खामोशी से
बिना किसी दिखावे के।
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