दिल से जो हो
दिल का रिश्ता
जुड़ा हुआ तो
दो दिलों के बीच की दूरी
कोई मायने नहीं रखती
एक ही स्थान पर
एक घर में
एक छत के नीचे
साथ साथ ही बैठे हों
दो लोग और
उनके मध्य कोई संवाद न हो तो
यह बात मन को कुछ भाती नहीं
दूरी या नजदीकी
निरर्थक है गर
दिल धड़कता हो किसी के लिए
कोई भी पड़े सामने तो
उसके लिए दिल में
मोहब्बत का फूल खिलना चाहिए
नफरत का शूल किसी को कभी
चुभाना नहीं चाहिए
नफा नुकसान के हिसाब से भी
इस तरह की सोच से किसी को कोई नुकसान नहीं।
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