मैं तुमसे कोई सवाल नहीं पूछूंगी
क्यों नहीं पूछूंगी
इस सवाल का जवाब यह है कि
मैं तुमसे ही नहीं अपितु
कभी भी
किसी के जवाबों से कभी संतुष्ट नहीं
हो पाती
मैं खुद से ही सवाल करती हूं और
उनके जवाब भी खुद ही तलाश
लेती हूं
अब वैसे भी देखो ना
हर मुसाफिर की यात्रा का
हमसफर उसका खुद का साया ही
होता है
कोई दूसरा कभी नहीं
भीड़ तो दुनिया का बस एक
रेला है
यह किसी की खुशियों का
मेला नहीं
तय करूंगी मैं अपने जीवन
की यात्रा अकेले ही
खुद से ही बातें करती
सवाल जवाब करती
अपनी जिंदगी की
परेशानियों के उपाय
खुद ही निकालती।
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