मैं क्षमा प्रार्थी हूं


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मुझे लगता है कि

मैंने कोई गलती कभी नहीं करी है

किसी के साथ कोई बुरा व्यवहार नहीं किया है या

किसी को जानबूझकर नहीं सताया है लेकिन

मेरे यह कहने भर से यह बात सच साबित नहीं हो जाती

लोग तरह-तरह के हैं और

उनके दृष्टिकोण भी अलग-अलग हैं

हो सकता है इनमें से अधिकतर को

मेरे में कमियां और खामियां ही

नजर आती हों

हो सकता है कि इनमें से कुछ मेरे

जानी दुश्मन हो

हो सकता है कि इनमें से कुछ मेरे से नाराज हो तो

मैं खुद की नजर में सही लेकिन

इनकी नजर में चूंकि

गलत हूं तो

जिनकी सोच मेरे प्रति

इस तरह की किसी भी कारणवश

बन गई है तो

मैं उन सबसे क्षमा प्रार्थी हूं

थोड़ा झुकने से या

क्षमा मांग लेने से कभी कोई

छोटा नहीं हो जाता बल्कि

वह अच्छे, भले और महान

व्यक्तियों की श्रेणी में ही फिर

गिना जाता है।


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