मैं ऐसी ही हूं


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खुश हो जाती हूं

जब कभी यदा कदा

जिंदगी के रास्ते तय करती

टकरा जाती हूं तुमसे

एक पल के लिए

भूल जाती हूं

सफर को,

मंजिल को,

अपने सपनों को

सामने खड़े तुम ही

कल रात्रि का ख्वाब

वह आसमान का चांद जो

उतरकर नहीं आया था

मेरे कमरे की खिड़की के रस्ते मेरे पास

वो आज हकीकत में

सच में

अपने समक्ष

अपनी आंखों के सामने खड़ा पाती हूं 

तुम गलती से भी इसे प्यार समझने की भूल

कभी कर न बैठना

मैं ऐसी ही हूं

मेरा दिल जो आखिर शायराना ठहरा।


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