मेरे संग संग मुस्कुरायेंगी


0

समुन्दर की एक बड़ी लहर जो

पानी के जहाज से टकराई

मेरी नींद टूटी और

मैंने सुबह की लालिमा में ली

एक सकुचाई सी

जलतरंग बजाती ही एक सुरमई अंगड़ाई

मैं यह जल यात्रा बस

पलक झपकते ही पूरी कर लेना चाहती हूं और

छोटी बड़ी रंग बिरंगी

मछलियों के संग अठखेलियां करती

समुन्दर के किसी मनोरम तट पर

पहुंच जाना चाहती हूं

समुन्दर की यह आंख थी या

दिल जिसमें

कितना पानी भरा था और

इसकी गहराई नापना भी मेरे लिए तो

एक असम्भव सा कार्य था

समुन्दर की लहरें किनारे तक पहुंचेंगी

तभी शायद यह मुझे भी

सही सलामत मेरी मंजिल

तक पहुंचा कर मेरे संग संग ही आखिरकार

रोये बिना मुस्कुरायेंगी।


Like it? Share with your friends!

0

0 Comments

Choose A Format
Story
Formatted Text with Embeds and Visuals