मेरे वालिदैन मेरे लिए खुदा से भी बढ़कर थे


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किसी व्यक्ति या वस्तु को

उसके न रहने या होने पर

गर आप एक लंबे समय तक प्रतिस्थापित न कर पायें तो

यकीनन दिल दिमाग खुद को

यह सोचने के लिए बाध्य कर ही देता है कि

कुछ तो बहुत खास या विशेष था ही

उस व्यक्ति या वस्तु में जो नहीं बदकिस्मती से अब मौजूद

नहीं तो किसी को कहां कोई इस कदर प्यार या उसे याद करता है

घूम फिर कर मेरे जीवन की कहानी

मेरे वालिदैन के इर्द गिर्द ही मंडराती है

मैं करूं भी क्या

मुझे उनसे बेहतर कोई दिखा या

मिला ही नहीं फिर कभी इस

जीवन में

यूं तो यह दुनिया तरह तरह के बेहिसाब लोगों से भरा

एक मेला है

भांति भांति की वस्तुओं को

बेशुमार दुकानों में सजाये बैठा एक बाजार है

मैं अपने मां-बाप की

तारीफ करने के लिए

अल्फाज कहां से तलाशूं

मुझे उनकी महानता को कम करने का साहस नहीं करना है

मेरे लिए तो वह खुदा से भी बढ़कर थे अभी भी एक तरफ भगवान और

दूसरी तरफ मेरे मां-बाप खड़े हों और मुझे किसी एक को चुनना हो तो

मैं निसंदेह अपने मां-बाप को ही चुनूंगी

मैं चाहूंगी कि मुझे हर जन्म में

उन्हीं का साथ मिले

वह तो अब मुझे शायद कभी किसी भी रूप में नहीं मिलेंगे लेकिन

उनसे थोड़ा बहुत मिलता जुलता ही 

किसी का जो मुझे कुछ पलों के लिए साथ मिल जाये तो

मैं अपने परवरदिगार की

बहुत शुक्रगुजार रहूंगी।


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