दिल बोलता है
कलम लिखती है
स्याही बिखेरती है
कागज समेटता है
जो कोई मेरे लिखे कलाम को पढ़ता है
क्या वह मेरे दिल में बसी
भावनाओं की गहराइयों को भी
बखूबी समझता है!
दिल बोलता है
कलम लिखती है
स्याही बिखेरती है
कागज समेटता है
जो कोई मेरे लिखे कलाम को पढ़ता है
क्या वह मेरे दिल में बसी
भावनाओं की गहराइयों को भी
बखूबी समझता है!
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