भगवान सदृश्य मां-बाप का
मुझे मिलना
मेरे जीवन की सबसे बड़ी खुशी,
पूंजी, उपहार, सफलता और उपलब्धि रही है
किसी बच्चे का आधार तो
उसके मां-बाप ही होते हैं ना
उसके जन्मदाता
उसके पालनहार
उसके रक्षक
उसके हमदर्द
उसके शुभचिंतक
उसके दोस्त
उसके मार्गदर्शक
उसके गुरु
उसके शिक्षक
उसके हमसफर
उसके…
यह सूची तो बहुत लंबी हो सकती है लेकिन
शायद मां-बाप होते हैं
खुदा से भी बढ़कर
किसी के होते हों या नहीं
मेरे तो थे
भगवान राम और सीता मां की जोड़ी से
इस अनमोल उपहार में कौन से ऐसे रंग या खुशबू थे
जो शामिल नहीं थे
सब कुछ तो मिला हुआ था मुझे
इस निर्मोही संसार में
अपने मां-बाप के सानिध्य में
एक बरगद का पेड़ थे दोनों
जिसकी छांव में कोई घाव नहीं था
जिसकी शीतलता का कोई मोल नहीं था
जिसकी कोमलता भरे स्पर्श का कोई तोड़ नहीं था
उनकी छत्रछाया में एक प्रभु की प्राप्ति का सा अहसास होता था
उनसे निरंतर मिलता था साहस,
अपनापन और आशीर्वाद की
निश्चल सी बहती एक अलौकिक
धारा
मेरी यह खुशी लेकिन अब न जाने कहां विलीन हो गई
अपने मां-बाप की सीख को लेकिन मैं आज भी नहीं भूली हूं
दोहराती रहती हूं मन ही मन में उनकी प्रवचन सी सुंदर बातों को
उनकी छवि भी हरदम उतरी रहती है
मेरे मन में
मेरे हृदय में बसते हैं मेरे मां-बाप
मेरे रोम रोम में प्रवाहित है उनका प्रेम
मेरे कण -कण में बसती है उनकी आत्मा
मैं जब तक हूं जीवित
मेरे मां-बाप बने रहेंगे मेरे लिए
मेरे जीवन का सबसे बड़ा आधार, संबल और
खुशी का कारण।
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