मेरे पिता
मेरे लिए क्या थे
इसे शब्दों में बांध पाना
मेरे लिए एक अत्यंत कठिन कार्य है
ऐसे महान व्यक्तित्व के वर्णन के लिए
मैं एक बौना पात्र हूं हालांकि
उनकी प्रिय पुत्री हूं
मेरे पिता का जब तक इस जीवन में साथ मिला
किसी दुख तकलीफ अंधेरे ने मुझे
भूल से भी छूने का साहस नहीं किया
एक अलौकिक रोशनी में नहाती रही मैं
उनके रोशनी भरे साये के तले
प्रेम का अर्थ जाना मैंने
विस्तार से
जब एक सच्चा प्रेम पाया
मैंने निरंतर उनसे
उनके सानिध्य में
मेरे पिता
ईश्वर का ही एक रूप थे
मेरे लिए वह एक सुंदर संसार थे
मेरी सृष्टि थे
मेरी दृष्टि थे
मेरे सूरज, चांद, सितारे
मेरे फूल, उपवन, सुगंध
सब कुछ तो थे
उनके समीप बैठकर
यह अहसास होता था कि
मैं एक पूजा स्थल में बैठी हूं
मुझे कभी किसी की पूजा अर्चना की आवश्यकता
महसूस नहीं हुई
मेरे पिता ने मुझे हमेशा
एक अच्छा इंसान बनने की
प्रेरणा दी
मेरे दिल के दर्पण को चमकाते रहे
मेरे दिमाग में कभी कोई भ्रम पैदा नहीं किये
वह भौतिक रूप से चाहे अब मेरे साथ न भी हों लेकिन
मेरी यादों में हमेशा जीवित रहेंगे
एक फूल की खुशबू की तरह
मेरे दिल की बगिया में महकते रहेंगे।
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