सुना है
मेरे गांव में जो
नदी बहती है
उसकी गहराई बहुत है
मुझे तो उसके किनारे तक
जाने में भी डर लगता है
यह महज कहानियां नहीं
हकीकत भी है
मेरी आंखों देखी कि
वह नदी न जाने कितनों को
अपने संग बहाकर ले गई
पीछे कुछ रह गया तो
उन लोगों की यादें
नदी को यह समझ भी नहीं कि
वह एक जीते जागते इंसान की
मृत्यु का कारण बन रही है
वह किसी जीवित को भी
शायद एक वस्तु मात्र समझ लेती है बहुत भोली और नासमझ है
उसके इस कृत्य को अपराध
की संज्ञा नहीं दी जा सकती
उसे कोई सजा भी नहीं सुनाई जा सकती
उसकी गति पर कोई पाबंदी भी
नहीं लगाई जा सकती
मेरा नियंत्रण किसी पर नहीं
आजकल कोई किसी की नहीं सुनता मेरे हाथ में तो इतना भर है कि
मैं उससे दूर रहूं
खुद को सुरक्षित रखूं
वह कभी सूख भी जाये
उसका पानी हो कम
तब भी मैं उसमें डूबकर मर
जाऊंगी
इसका सीधा सा एक कारण कि
मुझे तैरना भी तो नहीं आता।
0 Comments