मेरी मंजिल


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मुझे तो मेरी मंजिल
एक टुकड़ा जमीन ही चाहिए
नहीं चाहिए
मुझे कोई नदी, शहर, जंगल, पहाड़, झरना या कोई फैला हुआ आसमान रास्ता जो मैं तय करूं
वह हो मेरी तरह ही समतल
न हो कहीं से चपटा या टेढ़ा-मेढ़ा
मुझे वह न उठाये, न ही गिराये
बस मेरे हौले हौले आगे बढ़ते हुए
कदमों से आहिस्ता आहिस्ता
मुझे मेरा रास्ता मंजिल की ओर
ले जाते हुए एक सरल, सहज और सुंदर तरीके से
तय करवाये
मंजिल तक मैं न भी
पहुंच पाऊं तो मुझे कोई
अफसोस नहीं होगा
मेरी जिंदगी का रास्ता मेरे
ख्वाब सा ही जो सुंदर होगा।


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