मुझे आजादी चाहिए
हर उस व्यक्ति से
हर उस वस्तु से
हर उस क्रियाकलाप से
हर उस भाव भंगिमा से
हर उस वार्तालाप से
हर उस बंधन से
हर उस परिवेश से
हर उस तन से
हर उस मन से
हर उस आत्मा से
हर उस सजीव या
निर्जीव या
इस संसार के किसी भी कण से जो
बिना कारण
जानबूझकर
मुझ पर बुरा प्रभाव डालने की
कोशिश करते हैं
मुझ जैसी एक शुद्ध आत्मा के
अंतर्मन को निरंतर ठेस पहुंचाते हैं
उसके आत्म सम्मान को चोट
पहुंचाते हैं
उसे हर तरह से प्रदूषित करते हैं
मुझे मुक्ति चाहिए
इस तरह के एक भयंकर प्रदूषण से हमेशा के लिए
जब तक मैं जीवित हूं और
विचर रही हूं इस
धरती की सतह पर
अपने हौले हौले कदमों से
सांस भरती सरलता से
एक बहुत ही सामान्य
किसी जीव की तरह।
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