रास्ता लंबा है
कदम लेकिन थक गये हैं
एक कदम भी आगे नहीं बढ़ पा रहा
कई बार सोचती हूं कि
तन की ताकत बड़ी होती है या
फिर मन की
भीतर से इस प्रश्न का उत्तर
मिलता है कि
निश्चित तौर पर मन की
चलो फिर पल दो पल
ठहर जाती हूं
इस रास्ते के ही किसी मोड़ पर और
विश्राम करती हूं
खामोश रहकर
मन से वार्तालाप करती हूं
उसे समझाती हूं
उसे प्रेरित करने का भरसक
प्रयत्न करती हूं
चलना तो है
रास्ता पार भी करना है
मंजिल को भी पाना है तो
चल राही
क्या सोचना कठिनाइयों के
बारे में
बस थोड़ा-थोड़ा खुद में
हौसला भरता रह और
बिना इधर-उधर देखे
बिना मन को भटकाये
अपनी मंजिल की ओर
देखता हुआ
आगे बढ़ता चल।
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