मधुर कल्पना: स्मृति श्रीवास्तव द्वारा रचित कविता


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सुन,ग्राम की प्यारी सलोनी गुजरिया,
सुंदर सुकोमल सुकुमारी सी गोरिया।
सीधी सी, नाजुक सी, अल्हड़ तू भोली,
बांकी सी चितवन है तेरी हमजोली।
तेरे माथे का टीका चांद सा दमके,
हाथों की चूड़ियां खन खन खनके।
माथे की बिंदिया चम चम चमके,
तेरे बालों का गजरा मह मह महके।
तेरे कानों के झुमके यूं लहराएं,
शीतल बयार ज्यों मन को लुभाए।
निश्छल हंसी तेरी बड़ी मनमोहिनी,
हिरनी सी चंचल ओ मृगनयनी ।
झीनी सी चूनर से किए तन बंद,
रति काम सकाम किए सानंद।
मन तेरा सुने  तन का संवाद,
तन तेरा करे मन का अनुवाद।
गुनगुना तू जीवन का संगीत,
मिल जाए तुझे तेरे मन का मीत।
मुस्कराए तेरे मन की कामना,
साकार हो तेरी मधुर कल्पना !!!

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