पटरी है
गाड़ी है
चालक है
सवारी है
मंजिल पर आगे बढ़ने की
भरपूर इसकी या उसकी या सबकी तैयारी है
मौसम भी सुहाना है
बहारों का मस्ती लुटाता कोई जादुई खजाना है
आशिकी का रोग वही सदियों पुराना है इश्क जिंदगी बसर करने का
एक अंदाज मस्ताना है
बीच सफर कहीं चांद को भी बना
लेंगे अपना हमसफर
बस यही बाकी था वह किस्सा जो
आप सबको सुनाना था।
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