बच्चों के द्वारा दिये गये शिक्षक प्रसंग भगवान के एक प्रसाद के सम


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  ऐसा कौन है या

क्या है इस संसार में

जिससे किसी न किसी प्रकार की शिक्षा ग्रहण न की जा सकती हो

जब हम बच्चे थे तो

शायद उम्र में हमसे बड़े

हमसे कुछ न कुछ

जाने अनजाने

सीख लेते होंगे

अब हम उम्र में बड़े हैं तो

बच्चों से क्यों नहीं कुछ सीखेंगे

अवश्य सीखेंगे

हर हाल में सीखेंगे

बच्चे तो वैसे भी एक तनाव मुक्त जीवन व्यतीत करते हैं तो

उनकी दृष्टि किसी भी बात को लेकर बहुत सकारात्मक, साफ और

भेदभाव रहित होती है

उनमें कोई छल कपट भी नहीं होता

जो दिल से महसूस करते हैं

वही सब बाहर उगल देते हैं

उनकी वाणी और क्रियाकलापों में सच्चाई होती है

झूठ और आडंबर का कोई आवरण

उस पर चढ़ा नहीं होता

उनका दृष्टिकोण एक शीशे की तरह चमकता हुआ और 

साफ सुथरा होता है निष्पक्षता से अपनी बात कहने का

वह हुनर रखते हैं

एक सुबह की ताजगी से वह भरे होते हैं बेहद संवेदनशील

पूर्ण रूप से प्राकृतिक

ऊर्जावान

तेजवान

सूर्य और चंद्रमा के समान

किसी बाग के फूल कलियों से सुगंधित 

उनका कोमल हृदयस्पर्शी व्यवहार सबको प्रेरित भी करता है

जीवन की बुझती उमंग को वह फिर से जीवंत करने का 

जैसे अपने छोटे कंधों पर दायित्व सा निभाते हैं

उनके हृदय में भगवान का वास होता है उनके मुख, वाणी, शब्दों आदि में

एक प्रवचन की सुंदर लहर सी होती है बच्चे वास्तविक होते हैं

कहीं से बनावटी नहीं

वह भगवान सदृश्य होते हैं

उनके द्वारा दिये गये शिक्षक प्रसंग

बहुत प्रेरक और उनके माध्यम से

भगवान द्वारा अपने शिष्यों और भक्तों  के हाथों में पहुंचाये गये

एक प्रसाद के समान होते हैं

इन्हें पूर्ण मनोयोग से सदैव ग्रहण करें।


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