बचपन का समय


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बचपन का समय

किसी मनुष्य के जीवन काल का

सबसे अच्छा और उत्तम समय होता है

उसके पास उस समय

सब कुछ होता है

उसके मां बाप

भाई बहिन

दोस्त, रिश्तेदार, पड़ोसी

खेलने के लिए समय

पढ़ने के लिए समय

खाने पीने के लिए समय

सोने जगने के लिए समय

नाचने गाने के लिए समय

घूमने फिरने के लिए समय

धमाचौकड़ी मचाने के लिए समय

उधम बाजी के लिए समय

छेड़खानी करने के लिए समय

आंख मिचौली खेलने के लिए समय

हंसने रोने खिलखिलाने के लिए समय

कुछ नया सीखने के लिए समय

समय ही समय और

पर्याप्त समय

वह इस समय में

दुनिया का सबसे अमीर

इंसान होता है

यह उसे तब नहीं लेकिन

जब यह दौर गुजर जाता है तब

पता पड़ता है

यह एक स्वर्णिम युग होता है

खुशियां ही खुशियां दामन में

भरी होते हैं

बेफिक्री का आलम होता है

चिंता मुक्त

भयमुक्त

तनाव मुक्त

बचपन में हम सब जो होते हैं

बच्चे और

एक बच्चे से ही होते हैं मासूम,

निश्चल,

मस्त,

खिलाड़ी,

मदारी

एक धड़कता हुआ प्यार भरा दिल लिए

उस भाव को, उस समय को, उस प्रीत की डोर को फिर आगे

क्यों नहीं बढ़ा पाते या

उपयोग में ला पाते या

अपने जीवन के हर पहलू में

उतार पाते

ऐसा करने की अभी भी

सोच लें और

हो जायें कहीं जो इसमें

पूर्ण या आंशिक रूप से

सफल तो

फिर से बचपन के गुजरे

जमाने को लौटा पायें

और एक बार फिर

एक हंसते खेलते बच्चे से ही

बन जायें।


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