फूलों को भी हक है जिंदा रहने का


0

फूलों का गुलदस्ता
न किसी को देना चाहिए
न किसी से लेना चाहिए
न इसे कहीं किसी अवसर पर
सजाना चाहिए
हम क्यों तोड़ें किसी बगिया से
इतने फूलों को
एक फूल
चाहे हो वह कागज का या
प्लास्टिक या
एक चित्र के रूप में अंकित
काफी है
किसी को देने के लिए
फूलों को कभी तोड़ो नहीं
गुलदस्ते में सजाने या
किसी को देकर उसका दिल खुश
करने के लिए
उन्हें लगा रहने दो उनके
पेड़ पौधों पर
उन्हें भी हक है
जिंदा रहने का
कुछ समय के लिए
खुद को खुश करने
के लिए
किसी दूसरे की खुशियां कभी न
छीने
संवेदनशीलता की शुरुआत
फूलों से ही करें
वह नहीं होते हैं बेजान
उनमें भी होता है जीवन
होती है जान
उनके लिए सोचा तो
यह यात्रा संवेदनशीलता की
आगे बढ़ेगी नहीं तो
असंवेदनशीलता और अपराध की गति और दुर्गंध इस अपरिपक्व समाज से कभी नहीं हटेगी।


Like it? Share with your friends!

0

0 Comments

Choose A Format
Story
Formatted Text with Embeds and Visuals