प्यार की शमा की लौ कभी बुझे नहीं


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यह हमारे प्यार का

पहला कदम है

तुम मेरी अंगुली में

मेरे हाथों को अपने

हाथों से पकड़कर

बड़े प्रेमभाव से

मनोयोग से

समर्पण भाव से

मुझे अंगूठी जो पहना रहे हो

मैं इस अनमोल पल में

बहुत खुश हूं लेकिन

यह समय

यह खुशियों के पल

यह प्यार मुझे आगे भी

ऐसे ही मिलता रहे तो बात बने

यह मेरे दिल में तेरे प्यार की

शमा ऐसे ही जलती रहे

कभी इसकी लौ बुझे नहीं

कहीं से कोई ऐसी खिड़की खुले नहीं

जहां से एक तेज हवा का झोंका या

आंधी आये और इसे बुझा दे

सब कुछ तहस नहस कर दे

समय बदलता रहे लेकिन

यह प्यार न बदले

तुम बदलो तो बदल लेना लेकिन

मेरे दिल में पलता प्यार

तुम्हारे प्रति कभी न बदले

मेरी भगवान से यही प्रार्थना है कि

मुझे सारी दुनिया का प्यार

बेशक न मिले

मेरी उम्र चाहे गिनती में कम हो

लेकिन

मुझे तुम्हारा प्यार मिलता रहे और

मेरे प्यार की उम्र मेरी जिन्दगी से

हमेशा एक कदम आगे रहे

उसे पीछे मुड़कर देखने की

कभी अपने फैसलों पर

पछताने की

शर्माने की

सिर झुकाने की

आत्मसम्मान पर चोट खाकर

डगमगाकर गश खाकर गिर जाने की जरूरत न

पड़े।


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