किसी से मिलो तो
एक बरसती हुई
बारिश की फुहार की तरह
उसमें अपने प्रेम की सुगंध भी घोल दो
और
महका दो अपने मेहमान का दामन
तुम्हारे घर से जाने के पश्चात
वह कुछ पल तो कम से कम
महसूस करे तुम्हारे स्नेह का
अपनत्व भरा स्पर्श
यूं तो कहने को कभी कोई अपना
बनता नहीं
सारी उम्र के लिए
अपने भी अब तो अपने नहीं रहे
पराये कहां अपने होंगे लेकिन
अपनी तरफ से यह कोशिशों का
सफर जारी रखने में हर्ज ही क्या है
प्यार की बहार लुटाने की पहल
कोई दूसरा न करे तो
पहल खुद से कर लेने में
कभी कोई बुराई नहीं।
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